Geeta ke Shlok Mar 28, 2026Mar 28, 2026 श्लोक: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में नहीं। इसलिए फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का पालन करो। 🧘 2. आत्मा की अमरता (Chapter 2, Shloka 20) श्लोक: न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे॥ अर्थ: आत्मा न कभी जन्म लेती है और न कभी मरती है। शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा नष्ट नहीं होती ⚖️ 3. धर्म की स्थापना (Chapter 4, Shloka 7-8) श्लोक: यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ अर्थ: जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का बढ़ावा होता है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं—सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए। ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ WhatsApp us