Geeta ke Shlok

श्लोक:

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥

अर्थ:

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में नहीं। इसलिए फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का पालन करो।

🧘 2. आत्मा की अमरता (Chapter 2, Shloka 20)

श्लोक:

न जायते म्रियते वा कदाचि
न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥

अर्थ:

आत्मा न कभी जन्म लेती है और न कभी मरती है। शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा नष्ट नहीं होती

⚖️ 3. धर्म की स्थापना (Chapter 4, Shloka 7-8)

श्लोक:

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥

अर्थ:

जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का बढ़ावा होता है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं—सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए।

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥